आवारा मसीहा

Wednesday, February 3, 2010

मेरा दोष है..........

मै मानता हूँ कि कहीं ना कहीं पत्रकारिता को कुछ लोग एक व्यवसाय के रूप में देखते हैं। लेकिन आज भी ऐसे पुरोधा मौजूद हैं जिनके लिये पत्रकारिता एक जुनून है, जज्बा है। पत्रकार की दिनचर्या निश्चित नही होती है। समाज को सच्चा आईना दिखाने के लिए वह गर्मी और सर्दी की परवाह किये बगैर निरन्तर अपने कार्य में लगा रहता है। लेकिन इसे एक विडम्बना समझे या एक कड़वा सच कि लोग जागरूक ना होकर एक दूसरे पर उंगली उठाने लगे हैं। कहीं कूड़ा फैलाने की बात हो या किसी स्त्री का बलात्कार, लोग हमेशा दूसरों को दोषी करार देते है, क्या प्रेस और मीडिया को दोषी कह देने से समाज का सुधार हो जायेगा। बूंद-बूंद से सागर बनता है और एकता में बल है सिर्फ कहने की बातें नही हैं, इसके लिए हम सबको एक साथ मिलकर आगे आना होगा। समाज कि हर समस्या के लिये हम समान रूप से जिम्मेदार है।
posted by ॐĢĂÛŔΔ٧ॐ at 12:29 AM

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