आवारा मसीहा

Friday, May 9, 2008

रोता है मसीहा


कुर्सी का लालच जब तक खत्म न होगा ,

भारत के विकास का मार्ग प्रशस्त न होगा ।



सुरक्षा की चादर ताने करते है ये अपना काम ,

सज्जन बताकर अपना नाम ,करते है देश को बदनाम ।



दुर्बलो और असहायों के बल पर चलता है इनका राज ,

आश्वासन पूर्ति के बल पर पूरे होते देश के काज ।



हिंसा इच्छा लालच चुगली होते है इनके नारे ,

धीरज मे इनके इनके आकर पछताते है लोग बेचारे ।



रोता है ह्रदय देखकर देश की हालत ,

अब कौन सा मसीहा आयेगा दिलाने देशद्रोहियों से राहत।



राष्ट्रगान और वंदेमातरम जिनकी जिह्वा न गाती है,

गाँधी भगत अशफाक की कुर्बानी जिन्हें याद न आती है।



ऐसा सफेदपोश जब तक जिंदा दफ़न न होगा ,

भारत के विकास का मार्ग प्रशस्त न होगा ।
posted by ॐĢĂÛŔΔ٧ॐ at 11:58 PM

7 Comments:

good gazzy lage reho

May 10, 2008 at 12:34 AM  

'well done' hindi to bahut acchhi likhi hui hai.kahan se maari hai?

May 10, 2008 at 12:36 AM  

wah kya baat hai,,,,
great thinking.....

good going
&
keep it on,,,,,,

May 11, 2008 at 12:02 AM  

so bahi tu to desh bhakt ho gaya gay,,,,,,,

wande matram,,,,,

good start,,,,,

May 11, 2008 at 12:04 AM  

kya baat hai dear,,,,,,

awara masheeha,,,,,

tab to tum gulam ali ban jao,,,,,

mai aur meri awargi,,,,,,,,,,,

May 11, 2008 at 12:06 AM  

o balle balle wadia hai yaar lage raho ?

May 25, 2008 at 10:43 PM  

kya re bhai mast hai

August 15, 2009 at 7:23 AM  

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