
आप सब यह सोच रहे होंगे की मैं इतने लंबे अन्तराल के बाद फ़िर ब्लॉग लिखने क्यों आया हूँ , लेकिन लगातार हो रहे अन्याय और वारदाते मुझे मजबूर करती हैं की अपनी भावना को आप लोगो के समक्ष रखूँ । रोज हो रहा आत्याचार अब हम भारतियों की आदत बन चुका है । हम भारतीये दूसरो की बुराइयाँ तो देख लेते हैं परन्तु अपने मन चिंतन में कभी नही झाकते हैं। कल तक जिस भारत में हम गर्व से कहते थे की हम भारतीय हैं , और यह भारत हमारा है , वहीं आज की हालत यह है की लोग इस बात पर लड़ रहे हैं की मुंबई मेरी है , या यु पी मेरी है । कल तक जहाँ सिर्फ़ रंग को लेकर भेद किया जाता था ,वहीं आज भाषा और धर्म को लेकर भी भेद किया जाने लगा है।
मैं समझता हूँ हमारे भारतवासी बहुत नादान हैं किसी के भी बहकावे में आने में इन्हे वक्त नही लगता है । जैसे ही कोई नेता अपना वोट बैंक बढ़ने के लिए जाती और धर्म क नाम पर बरगलाता है वैसे ही ये सरे काम काज छोड़ तुंरत दूसरो की निंदा करने में लग जाते हैं। ये भूल जाते हैं की हम भारतीये हैं इन्हे सिर्फ़ अपने मूल की ही चिंता रहती है।बस मेरा सवाल ये है की हम कब समझेंगे की हमें अब धर्म या राज्य क नाम पर लड़ना बंद कर देना चाहिए । यह पूरा देश ही हमारा घर है और हमें मिलकर इसके विकास का पथ तयार करना चाहिए।
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